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“तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता मेरी जान ।”

हॉस्पिटल से लौटने के बाद हवेली आज पहली बार इतनी खामोश लग रही थी। घर के बाकी लोग अभी अस्पताल में थे या किसी जरूरी काम से बाहर गए हुए थे। इसलिए पूरे घर में सिर्फ अनाया और आरोह थे।

अनाया का मन अब भी बेचैन था। पिछले कई घंटों की घटनाओं ने उसके भीतर जैसे तूफान खड़ा कर दिया था। वह बिना कुछ बोले अपने कमरे की तरफ बढ़ी।

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