
राघव कार में बैठ जैसे ही कार स्टार्ट करने वाला था ।।वह चाहत की तरफ देखा .....चाहत अभी तक उसे घूर ही रही थी ।। राघव सीट बेल्ट लगाते हुए कहा "मुझे इस तरह घूरना बंद करो मूनलाइट ,जो मैंने बोल दिया सो बोल दिया ।।अगर तुम्हें कॉलेज जाना है तो तुम्हें यह रूल्स फॉलो करने होंगे ।।नहीं तो फिर तुम्हें गर्ल्स कॉलेज नाम डाल देंगे।।
चाहत मुंह बनाते हुए कही " आप बात बात पर धमकी क्यों देते हैं ?मेरी गलती नहीं भी रहती फिर भी आप मुझे सजा कैसे देंगे ?अगर कोई लड़का सामने से आता रहेगा तो, मैं क्या अपनी आंखें बंद कर लूंगी।।
राघव कार स्टार्ट करते हुए कहा" हां अपनी आंखें बंद कर लेना तुम , क्योंकि मैं नहीं चाहता तुम्हारी नजर किसी भी लड़के पर पड़े।।
चाहत हंसते हुए कहीं" अगर हम अपनी आंखें बंद कर लेंगे तो फिर उसे लड़के से टकरा जाएंगे और फिर हम गिरने वाले होंगे तो .....वह लड़का मुझे अपनी बाहों में पकड़ लेगा ।।तब आप डिसाइड कर लीजिए मैं आंखें खोल कर चलूं या आंखें बंद करके चलो।।
राघव अपनी भौहें उठाते हुए कहा "मूनलाइट तुम्हें नहीं लगता है तुम बचपन में जितनी जितनी दरी सहमी रहती थी ।।।अब तुम्हारे अंदर थोड़ी बहुत हिम्मत आ गई है ,तुम मेरे आगे बोल रही हो।।। शायद मेरी गलती है तुम्हें सजा नहीं ना दे रहा हूं इसलिए।।
चाहत के चेहरे से हंसी गायब हो जाती है ।।वह मन ही मन राघव को कोसते हुए कही "सही बोल रहे हैं..... मैं तो चाहती हूं कि मेरे अंदर और हिम्मत आए।। इतनी हिम्मत है कि मैं आपके सामने से बोल कर सकूं कि आप कितने बड़े वाले बदतमीज , खुदगर्ज ,खडूस, मनहूस, इंसान है।। चाहत अलग-अलग तरह का मुंह बनाकर अपने मन में राघव को गालियां पर गालियां दिए जा रही थी ।।
तभी राघव की ठंडी आवाज सुनाई देती है "जितनी गाली देने हैं दे लो मन में, क्योंकि तुम में सामने से तो हिम्मत नहीं है कुछ बोलने की .....तो मन में ही बोलकर संतुष्टि करती हो खुद का ,लेकिन मुझे सब सुनाई देता है।। तुम आज घर चलो मूनलाइट मेरे ख्याल से तुम्हें सजा देनी पड़ेगी आज..... वैसे भी काफी दिन हो गए।। तुम्हारे करीब आए हुए।। मैं बिजी हो जा रहा हूं बिजनेस में तो तुम्हें टाइम नहीं ना दे पा रहा हूं ।।तुम्हें भी शिकायत होगी मुझसे आज सब शिकायत दूर कर दूंगा ।।कोई नहीं आज पूरी रात तुम्हें टाइम दूंगा ।।
चाहत के चेहरे पर ठंडे पसीने आने लगे ।।वह अपने हाथ से पसीना साफ करते हुए मन में सोचने लगी " समझ नहीं आता है क्या करूं ?सामने से बोल नहीं सकती, मन में सोच नहीं सकती ।।यह इंसान ना सच में एक दिन मेरी जान लेकर मानेगा।।। चाहत अब तुझे कुछ नहीं सोचना है , उनके सामने तो बिल्कुल भी नहीं ।।आज रात पता नहीं क्या होगा मेरे साथ ?भगवान बचा लेना इस बच्चे को इस डेविल्स से।।
तभी चाहत को खुद पर राघव की तीखी नजरे महसूस होती है वह जल्दी से अपनी नज़रें खिड़की से बाहर कर लेती है।।
दूसरी तरफ,
कुछ देर बाद जैसे ही आरोही अपनी आंखें खोल सामने देखती है ,तो हैरान हो जाती है ।।क्योंकि फरहान ने ड्राइवर के सर पर नहीं पैर पर गोली चलाई थी।
ड्राइवर नीचे जमीन पर पड़ा हुआ.... अपने पैर पड़कर छटपटा रहा था ।।उसे उस तरह छटपटाते देख रूही के आंखों में आंसू आ गया ।।वह गुस्से में अरहान पर उंगली पॉइंट करते हुए कहीं" आप खूनी है आप... आपने.......... उसे.... आपने.... उस पर गोली चला दी।।
अरहान गण वापस अपने कमर में रखते हुए आरोही की तरफ मुड़ा और जैसे वह आरोही के करीब जाने लगा।। आरोही डर से पीछे हटने लगी और डरते हुए बोली "नहीं.... मेरे पास मत आइए , मैं बता रही हूं। मेरे करीब मत आइए प्लीज.....।
अरहान को खुद बुरा लग रहा था ।।आरोही ऐसे हालत देखकर क्योंकि आरोही कभी उसे डरती नहीं थी और आज उस हद से डर रही है ।।जैसे उसने किसी का खून कर दिया हो ।।।लेकिन सच भी था कौन नहीं किया लेकिन खूनी मानजंर तो था न ।।वह तेजी कदमों से आरोही के पास जाकर जोर से उसे अपनी बाहों में भर लिया और पीठ थपथपाते हुए कहा "जान कुछ नहीं हुआ है उसे प्लीज आप खुद को कंट्रोल करिए ।।गलती उसकी थी उसे हम दोनों के बीच में नहीं आना चाहिए था।। और अगर आया तो उसका मारना तय था, मैंने उसे जान बक्शा दी..... यही बहुत है ।।
आरोही अरहान के बाहों से दूर होने के लिए स्ट्रगल करने लगी, लेकिन अरहान उसे अपनी गोद में उठाकर कार की तरफ बढ़ गया।।
अरहान आरोही को अपनी गोद में लिए हुए ही ....ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और कर ड्राइव करने लगा।।
आरोही अरहान के गोद से बार-बार उतरने की कोशिश कर रही थी ।।लेकिन अरहान की पकड़ से वह छूट नहीं पा रही थी ।।थक हार कर आरोही चुपचाप बैठ गई ।।
अरहान गाड़ी को घर की तरफ मोड़ लिया ,क्योंकि वह अब इस हालत में आरोही को कॉलेज लेकर नहीं जा सकता था ।।अरहान बीच-बीच में आरोही का चेहरा देख रहा था ।।जिस चेहरे को देखकर साफ पता चल रहा था कि उसे चेहरे की रौनक चली गई है।।
कॉलेज में,
अभिमन्यु प्रिंसिपल से बात कर रहा था और पीहू उसके बगल वाली चेयर में बैठी हुई थी।।
अभिमन्यु प्रिंसिपल को घूरते हुए कहा "मिस्टर खुराना आप अच्छे से जानते हैं ,यह कॉलेज कपूर फैमिली के अंदर आता है ।।तो बेहतर होगा कि यहां पर हमारे फैमिली मेंबर के बच्चे को कोई तकलीफ ना हो और अगर तकलीफ हुई तो फिर आपको तकलीफ हो जाएगी।।
अभिमन्यु इसके आगे कुछ बोलना .....तभी पीहू में बोल पड़ी "हां बिल्कुल सही बोल रहे हो अगर हमें तकलीफ हुई तो फिर आपको तकलीफ होगी ।।मतलब साफ है कि हम आपके कॉलेज से बाहर फेंकवा देंगे और यह आप धमकी समझिए।।
प्रिंसिपल तो हक्का-बक्का होकर पीहू को देखते रह गया।। मतलब जो लड़की खुद कॉलेज में एडमिशन लेने आ रहे हैं वह खुलेआम प्रोफेसर नहीं प्रिंसिपल को धमकी दे रही है ।।फिर भी प्रिंसिपल अपने चेहरे पर झूठी मुस्कान लाते हुए कहा " हा हा मिस कपूर आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।। मिस्टर शेखावत आप बिल्कुल फिक्र मत कीजिए आपकी फैमिली में किसी भी लड़की को यहां पर कोई प्रॉब्लम नहीं होगी ।।इस बात का हम पर्सनल ख्याल रखेंगे।।
अभिमन्यु पीयू का हाथ पकड़ कर चेयर से उठाते हुए कहा "इसी में आपकी भलाई है मिस्टर खुराना बाकी आप तो समझदार है।। इतना बोल अभिमन्यु पीहू को लेकर वहां से निकल गया।।
पीहू कॉलेज के बाहर आते ही ,भिमन्यु को उसे गोद में उठाने का इशारा करने लगी ।।
अभिमन्यु पीहू को मना करते हुए कहा "लिटिल एंजेल तुम कब बड़ी होगी ,अब तुम कॉलेज में आ रही हो ...।।थोड़ी तो अपने अंदर मैच्योरिटी लाओ,अब मैं तुम्हें गोद में नहीं उठाऊंगा खुद अपने पैरों से चलो।।
पूरे दांत पीसते हुए कही " अगर आपकी गोद में आने से अगर मैं इमैच्योरिटी होती हूं तो मुझे ये इमैच्योरिटी मंजूर है ।।।लेकिन मैं आपकी गोद में आएगी , फालतू का ड्रामा मत कीजिए मुझे गोद में उठाई है।।
लेकिन अभिमन्यु आगे बढ़ता जा रहा था ,पीहू मुंह बनाते हुए कही " जब आपको मेरी थोड़ी सी भी फिक्र नहीं होती है तो क्यों उसे प्रिंसिपल के सामने इतने लंबे-लंबे डायलॉग दे रहे थे।।
अभिमन्यु पीहू को घूरते हुए कहा "मैं कोई भी बात देख नहीं रहा था।। मैं उससे यह बात बता रहा था कि तुम तीनों को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए इस कॉलेज में....!! और यह नॉर्मल से बात है अगर मैं उसे नहीं बता तो आगे चलकर हो सकता है तुम्हें ,आरोही , या चाहत को कोई तो कोई प्रॉब्लम हो जाए इस कॉलेज में तो इसलिए मैं पहले से ही उसे वॉर्न कर रहा था।।ये सच है कि मुझे तुम्हारी बहुत फिक्र है ,ये तुम मानो या न मानो ।।
पीहू चिढ़ते हुए कही " बस कीजिए अगर आप वॉर्न नहीं भी करते ना तब भी हम धमकी देते हैं उसको , क्योंकि वह मेरे डैड का कॉलेज है और हम तीनों में से किसी को भी प्रॉब्लम होता तो मैं उसे प्रिंसिपल को कहीं का भी नहीं छोड़ती।।
अभिमन्यु न में अपना सर हिलाते हुए कहा "लेकिन प्रिंसिपल की बात को यहां की बातों से क्या लेना देना"।।
पीहू अपने चेहरे पर सीरियसनेस लाते हुए कही सी बहुत लेना देना है, आप वहां पर मेरी फिक्र दिखा रहे थे ना तो यहां अकेले में मेरी फिक्र दिखने में आपको क्या जा रहा है " आप सिर्फ बोए सकते है कर नहीं सकते है "!!
अभिमन्यु पीहू से बहस ना करते हुए पीहू को अपनी गोद में उठा लिया, पीहू एक झटके से अभिमन्यु के सीने से लग गई।। ना चाहते हुए भी अभिमन्यु के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।।
कपूर मेंशन,
नूपुर जी ,रणधीर जी ,अभिमन्यु, पीहू ,राघव और चाहत सब लिविंग हॉल में बैठे चाय और स्नेक्स खा रहे थे ।।तभी अरहान आरोही को अपनी गोद में लिए हुए हॉल में आता है।।
नूपुर जी जब अरहान के गोद में आरोही को देखती तो जल्दी से सोफे से खड़े होते हुए कहीं" अरहान आरोही बेटा को क्या हुआ? तुम इस तरह से गोद में उठाकर क्यों ला रहे हो ?तुम तो इस एडमिशन दिलाने दे गए थे ना, क्या हो गया ?मैं खिला पिलाकर भी भेजा था ,फिर कैसे तबियत बिगड़ गया।।।
चाहत जो चाय पी रही थी ,जल्दी से कप टेबल पर रखकर ....उठकर आरोही के पास जाने ही वाली थी , लेकिन राघव उसका हाथ बीच में पकड़ कर वापस सोफे पर बैठा देता है।।
चाहत अपना हाथ राघव से छुड़ाते हुए कही " हर वक्त आपको मजाक के क्यों दिखता है ?आपको दिख नहीं रहा है मेरी बहन को इस तरह अरहान भाई गोद में उठा कर ला रहे हैं ।।उसे कुछ प्रॉब्लम हो सकती है ,आप मुझे जाकर देखने दीजिए।।
लेकिन राघव उसकी एक नहीं सुनता है उसका हाथ सोफे पर दबाते हुए कहा "कुछ नहीं हुआ है उसे और अगर कुछ दिक्कत भी होगा तो अरहान संभाल लेगा ।।तुम्हें जाने की जरूरत नहीं है ,अभी ......अभी मैं तुम्हें कॉलेज से लेकर आया हूं ।।शांति से बैठे रहो वरना उसकी तबीयत को तो नहीं पता लेकिन तुम्हारी तबियत जरूर बिगड़ जाएगी।।
चाहत हैरत भरी नजरों से राघव को देखते हुए कही "मुझे विश्वास नहीं हो रहा है .....आपका ऐसा बोल सकते हैं।। इस दुनिया में अपने कहने के नाम पर सिर्फ मेरे पास मेरी बहन है ।।।इसे एक खरोच भी आती है ना यहां तक कि अगर उसे छींक भी आती है , तो मेरा दिल दिखाता लगता है "।।।फिर दर्द भरी मुस्कुराह के साथ कहीं "खैर हम भी किसे समझ रहे हैं ,उस इंसान को समझ रहे हैं जिसे आज तक कुछ नहीं खाया।। उसे मेरा दर्द का एहसास कैसे होगा ?इतना बोल चाहत अपना हाथ राघव के हाथ से झटक कर आरोही के पास चली गई।।
राघव अपनी हाथों की मुठिया भींच लेता है और जाती हुई चाहत को देखता रहा ।।
नूपुर जी और आरोही दोनों परेशान होते हुए अरहान से बार-बार यही सवाल कर रही थी "क्या हुआ आरोही को"?
लेकिन अरहान बिना किसी के सवालों का जवाब देते हुए सीढ़ियों से होकर आरोही के रूप में चला गया।।
रणधीर जी कन्फ्यूजन से अरहान को देखते रह गए अरहान जल्द ही आरोही को उसके कमरे में सुला कर नीचे आया और बाहर के तरफ जाने लगा।।
तभी रणधीर जी अपनी कड़क आवाज में अरहान को रोकते हुए कहें "लाड साहब आपकी मां आपसे कुछ पूछ रही है ?बताते जाइए की आरोही आपके साथ गई थी क्या हुआ है उसे ?
अरहान बाहर निकलते हुए कहा" कुछ नहीं हुआ है वह रास्ते में सो गई थी, इसलिए मैं उसे अपने गोद में उठा कर लाया हूं ।।अभी फिलहाल वह अपने रूम में सो रही है, तो आप सबसे यही उम्मीद रहेगा कि आप उसे सोने दें।।
नूपुर जी और आरोही चैन की सांस लेते हैं ।।वही पीहू हंसते हुए कही "मॉम और चाहत तो इतनी डर गई थी लगा तो जैसे पता नहीं आरोही को क्या हो गया है "??
नूपुर जी घूरते हुए पीहू से कही " तुम नहीं समझोगे ना एक बहन हो बहुत फिक्र होती है ....!!और हमें बहुत उम्मीद से भाई साहब और भाभी ने आरोही और चाहत की जिम्मेदारी हमें दी है ।।अगर कोई चूक होती है तो हम खुद की नजरों में शर्मिंदा महसूस करेंगे ।।
फिर वह रणधीर जी के तरफ देख कहीं "संभाल लीजिए अपनी बेटी को बहुत मुंह चलने लगे .... पता नहीं कौन लड़का शादी करेगा इससे ?
रणधीर जी अपनी चाय खत्म कर कर उठाते हुए कहें "हम तो अपनी बेटी संभाल लेंगे आप अपनी उसे लाड साहब को संभालिए ।।कभी तमीज नहीं हुई अपने बाप से बात करने की बचपन से उन्हें देखते आ रहे हैं हम।।
उनको तो फुर्सत नहीं मिलती की दो वक्त हमारे साथ बैठकर बिता ले....!! ऐसा थोड़ी है कि हम ऑफिस नहीं गए हम बिजनेस नहीं किया हम भी किए हैं लेकिन परिवार को टाइम देते थे ना।।
नूपुर जी मुंह बनाते हुए कही" अच्छा आप टाइम देते थे हमे तो नहीं याद है "।। "जितना मुझे याद है हर रोज मुझे आपसे लड़ना पड़ता था ,ताकि आप मुझे अपनी थोड़े से वक्त मुझे दे"।।
रणधीर जी अपनी नजारे चुरा कर वह से चले गए,और नूपुर जी अपनी तीखी नजरों से घूरती रही ।।
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