
सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी, ।।
लेकिन आज अनाया के दिल में वैसी चमक नहीं थी। बिस्तर के दूसरे हिस्से की खाली जगह उसे बार-बार याद दिला रही थी कि आरोह अभी इस हवेली में नहीं है। वह धीरे-धीरे उठी, अलमारी से हल्की नीली साड़ी निकाली और तैयार होने लगी। आईने में खुद को देखते हुए उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन आँखों में वही कमी थी—आरोह की कमी।










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