
माया कामिनी जी को ताना मारते हुए कहीं "वही तो आंटी जी आपको जो करना है ,आप वो कर नहीं रही है ।।फालतू में नौकरी पर चिल्ला रही है ।।
"आपको पता है आंटी जी रणविजय क्यों आपके हाथ से निकला ?क्योंकि इसमें आपकी गलती थी ,आपने उसे संभाल नहीं सकी ।।आप फालतू का अपना एटीट्यूड दिखाते रहे, एक दिन ऐसा आएगा कि आपके पास कुछ नहीं रहेगा ।।ना राजविजय , न पैसा ,ना पावर और जिसके दम पर इतना उड़ रही है ना, आपके पीछे का सरनेम वह भी नहीं रहेगा आपके पास ।।











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